पुलिस की कार्यशैली में हो ह्यूमन साइकोलॉजी – मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे

पुलिस की कार्यशैली में हो ह्यूमन साइकोलॉजी
जयपुर, 2 जून। मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे ने कहा कि अपराधों पर लगाम लगाने के लिए पुलिस अधिकारी अपनी कार्यशैली में ह्यूमन इंटेलीजेंस के साथ-साथ ह्यूमन साइकोलॉजी को भी शामिल करें। पुलिस अधिकारियों को उन बातों को समझने की नितांत आवश्यकता है जो अपराध का कारण बनते हैं।
राजे शुक्रवार को कलक्टर-एसपी कॉन्फ्रेंस के तीसरे दिन पहले सत्र में पुलिस अधिकारियों को सम्बोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि राज्य में बेहतर पुलिसिंग से कानून-व्यवस्था की स्थिति में सुधार हुआ है और अपराध कम हो रहे हैं। पुलिस अधिकारियों पर यह जिम्मेदारी है कि वे महिलाओं, बच्चों, कमजोर वर्गों पर होने वाले अपराधों की संवेदनशीलता के साथ तफ्तीश करें और अपराधियों पर सख्ती से लगाम लगाएं। मुख्यमंत्री ने अवैध हथियारों एवं अवैध शराब पर रोक, आम्र्स लाइसेंस आवेदनों के निस्तारण, दूसरे राज्यों की पुलिस से बेहतर संपर्क, सांप्रदायिक तनाव की घटनाओं को रोकने आदि पर भी चर्चा की।
 
राजे ने रेंज आईजी, पुलिस कमिश्नरों तथा पुलिस अधीक्षकों से कानून एवं व्यवस्था की स्थिति, अपराध नियंत्रण तथा स्मार्ट पुलिसिंग के लिए किए जा रहे नवाचारों पर फीडबैक लिया। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अपराध पंकज कुमार सिंह ने ‘अपराध विश्लेषण-चुनौतियां एवं समाधान‘ विषय पर तथा जयपुर पुलिस कमिश्नर संजय अग्रवाल ने राज्य में पुलिस द्वारा किए जा रहे नवाचारों पर प्रजेन्टेशन दिया।
 
थाने हों साफ-सुथरे
राजे ने पुलिस थानों के मालखानों में बरामद एवं जब्तशुदा वाहनों, शराब तथा अन्य सामान आदि के पड़े रहने पर चिंता व्यक्त करते हुए पुलिस अधीक्षकों से कहा कि वे इनके शीघ्र निस्तारण की पहल करें। मुख्यमंत्री ने इस दिशा में अलवर जिले में हुए सफल प्रयास की सराहना करते हुए सभी पुलिस अधीक्षकों को इस मॉडल को अपनाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि सालों तक भी इनका निस्तारण नहीं होने से थानों में कबाड़ का ढ़ेर लग जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि थाने साफ एवं सुन्दर होने चाहिए। उल्लेखनीय है कि अलवर में जिला पुलिस अधीक्षक ने विशेष प्रयास कर मालखानों से करीब 9 हजार वाहनों, दहेज प्रकरणों में जब्त सामान तथा तस्करी में जब्त अवैध शराब का 90 प्रतिशत निस्तारण कराने में सफलता हासिल की है।
जनता को बनाएं अपने आंख-नाक-कान
मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस ने प्रदेशभर में अपराधों पर लगाम लगाने के साथ-साथ सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौतों में कमी लाने का काम किया है। इसके लिए पुलिस अधिकारियों ने जो प्रयास किए हैं उन्हें प्रचार-प्रसार के माध्यम से लोगों तक पहुंचाना चाहिए ताकि जनता जागरूक होकर अपराध और हादसे रोकने में पुलिस की सहयोगी बने।
 
अभय कमांड से बेहतर हुआ पुलिस का रेस्पोंस टाइम
जयपुर पुलिस मुख्यालय पर स्थापित ’अभय’ कमांड एंड कंट्रोल सेंटर अपराधों पर लगाम लगाने में प्रभावी साबित हुआ है।  अपने प्रस्तुतीकरण के दौरान जयपुर पुलिस कमिश्नर श्री संजय अग्रवाल ने बताया कि शहर में 500 हाईटेक कैमरे लगाए गए हैं। इस सेंटर में स्थापित अत्याधुनिक वीडियो सर्विलांस सिस्टम, व्हीकल ट्रेकिंग सिस्टम, जीआईएस मैप आदि से पुलिस के रेस्पोंस टाइम में उल्लेखनीय सुधार आया है। पहले शहरी क्षेत्र में सूचना के बाद पुलिस को मौके पर पहुंचने में 15 मिनट तक का समय लगता था जो अब दस मिनट से भी कम हो गया है। वहीं बाहरी क्षेत्र में मात्र 12 से 13 मिनट की अवधि में पुलिस मौके पर होती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अन्य सम्भागीय मुख्यालयों पर ऎसे कमांड एंड कंट्रोल सेंटर स्थापित हो जाने के बाद तैयार होने वाला नेटवर्क अपराध नियंत्रण में एक कारगर प्रयोग साबित होगा।
 
रिटायर पुलिसकर्मियों एवं सैनिकों की लें मदद
मुख्यमंत्री ने बाडमेर में जिला पुलिस द्वारा सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों एवं पूर्व सैनिकों को मित्र मंडल के रूप में जोड़ने की पहल की सराहना करते हुए कहा कि अन्य सीमावर्ती जिलों में भी इस मॉडल को अपनाया जाए। उल्लेखनीय है कि बाडमेर में करीब 1500 पूर्व पुलिसकर्मियों एवं पूर्व सैनिकों को बतौर पुलिस मित्र मंडल जोड़ा गया है। इनके अनुभवों से वहां कई संगीन अपराधों को खोलने में पुलिस को सफलता मिली है।
मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे
बनें टैक्नो-फ्रेंडली
राजे ने कहा कि कैदियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, एडवांस फोरेंसिक सुविधाओं तथा ड्रोन आदि के उपयोग से हमने अपनी क्षमताएं बढ़ाई हैं। उन्होंने कहा कि विकसित हो रही टेक्नोलॉजी तक अपराधियों की पहुंच होने के कारण पुलिस को भी अपनी योग्यताओं और क्षमताओं को लगातार अपग्रेड करना जरूरी है।
 
इससे पहले गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने मुख्यमंत्री को प्रदेश की कानून-व्यवस्था की जानकारी देते हुए कहा कि अपराधों की तफ्तीश के लिए प्रदेश में फोरेंसिक लैब उन्नत और सक्रिय की गई हैं। उन्होंने अपराधों के अन्वेषण में डीएनए, फिंगर प्रिंट और फोरेंसिक साइंस की अन्य सुविधाओं के उपयोग पर जोर दिया।
 
कटारिया ने कहा कि पुलिस अधीक्षक को ई-मेल से एफआईआर, अभय कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, केस ऑफिसर स्कीम एवं एप, ऑल वुमन पुलिस स्टेशन और महिला हैल्प लाइन जैसे नवाचारों से लगातार तीसरे वर्ष अपराधों की वृद्धि दर में कमी आई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी 861 थानों को ऑनलाइन कर दिया गया है। साथ ही एफएसएल में लंबित प्रकरणों में भी उल्लेखनीय कमी आई है।
 
प्रमुख शासन सचिव गृह दीपक उप्रेती ने कांफ्रेंस की रूपरेखा की जानकारी दी। इस अवसर पर राज्य मंत्रिपरिषद् के सदस्य, मुख्य सचिव ओपी मीना, पुलिस महानिदेशक मनोज भट्ट सहित अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, सभी रेंज आईजी, पुलिस कमिश्नर एवं जिला पुलिस अधीक्षक भी मौजूद थे।

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