मंत्री के आदेश पर आचार संहिता के दौरान छापे, खाद्य विभाग में क्या खेल चल रहा है ?

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जयपुर । 17वी लोकसभा चुनाव के चलते राजस्थान में आचार संहिता लागू है। लेकिन इसके बाद भी मंत्री अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर सरकारी मशीनरी के जरिए छापे डलवा रहे है। मजे की बात यह है कि बकायदा विभाग की ओर से प्रेस नोट जारी कर इसकी जानकारी दी जा रहा है। ताजा मामला 16 मई का है और खाद्य एव नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग से जुड़ा है। मामला क्योंकि खाद्यमंत्री रमेश चंद्र मीणा से जुडा है इसलिए सारा सरकारी अमल मामले की गलतियां छुपाने में लगा है।

क्या है मामला
16 मई 2019 को राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग की वैबसाइट पर खाद्य एव नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग का एक प्रेस नोट जारी हुआ। विधिक माप विज्ञान टीम ने बस्सी स्थित राजधोक टोल प्लाजा एवं निजी धर्म काटों का किया निरीक्षण । प्रेस नोट में पहली लाइन में ही लिखा है कि यह कार्रवाई खाद्य विभाग के मंत्री रमेश चन्द्र मीणा के निर्देशन में हुई। प्रेस नोट में बताया गया विभाग की टीम के औचक निरीक्षण के बाद बस्सी स्थित राजा धोक टोल प्लाजा एवं ट्रासपोर्ट नगर में नवभारत धर्मकांटा का औचक निरक्षण किया गया । कमी पाए जाने पर फर्म मालिकों को राजकोष में 60,000 रुपय जमा करवाने के निर्देश दिए गए।

पहले मामला दबाया गया फिर मंत्री के नाम से प्रेस नोट जारी हुआ

विभाग की ओर से कार्रवाई विधिक माप विज्ञान निरक्षण दल के उपनियंत्रक चन्दीराम जसवानी की टीम ने की। सूत्रों के अनुसार विभाग की इस कार्रवाही को पहले गुपचुप रखा गया। लेकिन छापो की आड़ में विभाग में सक्रिया दलालो के सक्रिया होने से मोलभाव शुरु हो गए। परेशान पीडितों ने सरकार के आला अधिकारियों तक यह सूचना पहुंचा दी। मामला उल्टा पड़ता देख कार्रवाई करने वाली टीम ने अपनी खाल बचाने के लिए मंत्री के निर्देशन की आड़ लेकर सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग से फोटो समेत प्रेस नोट जारी करवा दिया गया। सरकारी प्रेस नोट के आधार पर कई अखबारो ने इस खबर को प्रमुखता से छापा । इस मामले में जब विभाग की शासन सचिव मुग्धा सिन्हा से जानकारी ली गई तो उनका कहना था कि वे 11 मई से 19 मई तक छुट्टियो पर थी और उन्हे किसी तरह के छापेमारी की जानकारी नही है।

क्यों सूचना जनसम्पर्क विभाग ने विवादित प्रेस नोट वैबसाइट से हटाया 

मामले में विवाद बढ़ने के बाद सूचना जनसम्पर्क विभाग ने 24 may 19 को विवादित प्रेस नोट हटा दिया गया है। इस मामले में विवादित अधिकारी उपनियंत्रक चंदीराम जसवानी विभाग के मंत्री और अधिकारियों का चहेता बताया जाता है।

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