वित्तीय वर्ष के पहले 7 सप्ताह में 3 इंटरस्टेट सहित 7 डिकॉय ऑपरेशन

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जयपुर: प्रदेश में भू्रण लिंग परीक्षण को रोकने के लिए प्रारम्भ की गयी मुखबिर योजना के तहत देय राशि 2 लाख रुपये से बढ़ाकर ढाई लाख रुपये कर दी गयी है। इस योजना के तहत अब तक 125 व्यक्तियों को 31 लाख रुपये की राशि प्रदान की जा चुकी है। इस वित्तीय वर्ष के पहले 7 सप्ताह में 3 इंटरस्टेट सहित 7 डिकॉय ऑपरेशन किये जा चुके हैं।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री कालीचरण सराफ की अध्यक्षता में सोमवार को सायं स्वास्थ्य भवन में आयोजित पीसीपीएनडीटी स्टेट सुपरवाईजरी बोर्ड की बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में सुपरवाईजरी बोर्ड सदस्य डॉ. मीना आसोपा, नीता पाटनी, एडवोकेट कानसिंह राठौड़, मीनाक्षी शर्मा, डॉ. तरूण पाटनी, एसआरकेपीएस के राजन चौधरी एवं मेडिकल एज्युकेशन के डॉ. एस.सी. सोनी सहित बोर्ड के सदस्यगण मौजूद थे।
सराफ ने बताया कि मुखबिर योजना के तहत दी जाने वाली ढाई लाख रुपये की राशि में से एक लाख रुपये मुखबिर को, एक लाख रुपये गर्भवती महिला (डिकॉय) को एवं शेष 50 हजार रुपये गर्भवती महिला के साथ जाने वाले व्यक्ति को दिये जाने का प्रावधान किया गया है। अब तक सूचना प्रदान करने वाले 49 मुखबिर को, 39 गर्भवती डिकॉय को एवं 37 साथ जाने वाले व्यक्ति सहित कुल 125 व्यक्तियों को मुखबिर योजना के तहत राशि प्रदान की गयी है। उन्होंने बताया कि गत वित्तीय वर्ष के दौरान कुल 33 डिकॉय ऑपरेशन किये गये।
चिकित्सा मंत्री ने बेटी बचाओ अभियान में महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ ही महिला आयोग एवं बाल संरक्षण आयोग के साथ सहभागिता करने की आवश्यकता प्रतिपादित की। उन्होंने बताया कि प्रदेश में इस समय 222 सरकारी एवं 2 हजार 538 निजी सहित कुल 2 हजार 760 सोनोग्राफी केन्द्र पंजीकृत हैं। प्रदेश में पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत अब तक कुल 11 हजार 98 निरीक्षण किये जा चुके हैं। कुल निरीक्षणों की संख्या वित्तीय वर्ष 2014 में 837, 2015 में 1430 एवं वित्तीय वर्ष 2016 में 2 हजार 468 रही तथा इस वर्ष 473 निरीक्षण किये जा चुके हैं। निरीक्षण के दौरान विभिन्न अनियमितताओं के कारण 196 पंजीयन निलम्बित, 427 निरस्त करने के साथ ही 483 सील व सीजर्स किये जा चुके हैं। इस समय कुल 652 मामले अदालतों में विचाराधीन है तथा 146 मामलों में सजा की जा चुकी है।
अध्यक्ष, राज्य समुचित प्राधिकारी पीसीपीएनडीटी एवं मिशन निदेशक एनएचएम श्री नवीन जैन ने बताया कि एनएचएम एवं बैंक ऑफ बड़ौदा के सहयोग से संचालित डॉटर्स आर प्रीसियस अभियान के तहत अब तक करीब 200 कॉलेजों व शिक्षण संस्थाओं में कार्यक्रम आयोजित कर करीब एक लाख विद्यार्थियों को यह संदेश दिया जा चुका है। उन्होंने बताया कि पीसीटीएस के तहत दर्ज आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2016 में जन्म के समय लिंगानुपात बढ़कर अब 939 हो चुका है।

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