संस्कृत के उत्थान पर ही भारतवर्ष बनेगा पुनः विश्वगुरू….स्वामी बालमुकुन्दाचार्य….

जयपुर । राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर के संस्कृत विभाग एवं श्रीसूरजमल तापड़िया मेमोरियल ट्रस्ट जसवंतगढ़ नागौर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी” मंत्र  चिकित्सा एवं रोग निदान” विषय पर लगभग 200 शोधपत्रों का वाचन हुआ ।संगोष्ठी में हरियाणा, उत्तर प्रदेश ,उत्तराखंड, मध्य प्रदेश ,जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र एवं राजस्थान सहित विभिन्न प्रांतों के शोधार्थियों ने अपने शोध पत्र के द्वारा वर्तमान युग में मंत्र चिकित्सा के द्वारा रोग निदान विषय पर सारगर्भित लेख प्रस्तुत किए। संगोष्ठी के समन्वयक डॉक्टर हेमंत कृष्ण मिश्र एवं संयोजक डॉ रामसिंह चौहान, विभागाध्यक्ष, संस्कृत विभाग राजस्थान विश्वविद्यालय ,जयपुर ने बताया कि संगोष्ठी में आर्थिक सहयोग तापड़िया ट्रस्ट के द्वारा किया गया है ।संगोष्ठी के उद्घाटन समारोह में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर आर के कोठारी, मुख्य वक्ता बलवीर आचार्य, प्रोफेसर एमडीएस यूनिवर्सिटी रोहतक  तथा संगोष्ठी के संयोजक डॉ राम सिंह चौहान उपस्थित रहे। कार्यक्रम संचालन डॉ चंद्रप्रकाश प्रकाश शर्मा प्रधानाचार्य ने किया। संगोष्ठी के समापन अवसर पर मुख्य अतिथि महामंडलेश्वर स्वामी श्री बालमुकुंद आचार्य महाराज दक्षिण मुखी बालाजी धाम हाथोज ,सारस्वत अतिथि  देवर्षि कलानाथ शास्त्री,मुख्य वक्ता पंडित अखिलेश शर्मा ज्योतिर्विद,अध्यक्षता प्रोफेसर विनोद शास्त्री कुलपति राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय जयपुर एवं  विशिष्ट अतिथि के रुप में श्री महेंद्र सिंह राघव न्यायाधीश पारिवारिक  एवं सत्र न्यायालय जयपुर उपस्थित रहे ।मुख्य अतिथि बालमुकुंद आचार्य जी ने अपने उद्बोधन में कहा “संस्कृत भाषा संस्कारों की जननी है बिना संस्कृत के भारत देश का महत्व उसी प्रकार नहीं है जिस प्रकार आत्मा रहित शरीर का ।संस्कृत के उत्थान परही भारत पुनः विश्वगुरू पदवी पर आरूढ हो सकेगा!

तापड़िया ट्रस्ट के द्वारा संस्कृत के उत्थान हेतु जो कार्य किए जा रहे हैं वह वस्तुतः कलयुग में धर्म अवतार जैसे हैं”। सारस्वत अतिथि देवर्षि कलानाथ शास्त्री ने बताया की संगोष्ठी का विषय मंत्र चिकित्सा एवं रोग निदान बहुत ही समसामयिक विषय है। हमारे पूर्वजों ने  विभिन्न  मंत्रों के द्वारा जटिलतम असाध्य रोगों का उपचार शास्त्रों में बताया है। अतः वर्तमान भागमभाग के युग में मंत्र चिकित्सा द्वारा रोगों का निदान किए जाने हेतु संस्कृत विश्वविद्यालय एवं समस्त संस्कृतज्ञों को आगे आना चाहिए। प्रोफेसर विनोद शास्त्री ने रोग निदान में ज्योतिष शास्त्र एवं मंत्र शास्त्र की महती उपयोगिता बतलाइ। मुख्य वक्ता पंडित अखिलेश शर्मा ने कुंडली में 12 भावों का विश्लेषण किया और सभी ग्रहों को प्रसन्न करने हेतु विभिन्न मंत्रों का सांगोपांग विवेचन करते हुए असाध्य रोगों का उपचार करने तथा सम्बंध विच्छेद होने जैसी गंभीर समस्या का निदान संस्कृत मंत्रों के द्वारा बतलाया। डॉ राम सिंह चौहान ने पधारे हुए समस्त अतिथियों का स्वागत व समन्वयक डाॅ मिश्र ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ सी पी शर्मा ने अपने ओजस्वी अन्दाज़ में किया।

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