राजलक्ष्मी महिला अरबन कॉ-आपरेटिव बैंक मामला- कौन से मंत्री पर लगे हैं आरोप

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जयपुर। राजलक्ष्मी महिला अरबन कॉ-आपरेटिव बैंक में डिफ्ल्टरो से वसूली के नाम पर पर वर्तमान बैंक सीईओ मोहम्मद इकबाल और संस्थापक अध्यक्षा डॉ फिरोजा बानो के बीच तू तू मै मै ने गम्भीर रुख इख्तार कर लिया है। आरोप प्रत्यारोप से अलग अब इस मामले में फिरोजा बानों ने सहकारिता मंत्री अजय सिंह किलक पर बैंक प्रबंधन और सहकारिता विभाग अधिकारियों के जरिए जांच प्रभावित करने का आरोप लगाया हैं। जयपुर पिंक सिटी प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में बानो ने खुलेतौर पर बानो ने आरोप लगाया कि बैंक की वर्तमान चैयरपर्सन मंत्री की रिश्तेदार की एन्ट्री पर भी सवाल उठाए  बानो ने राजलक्ष्मी महिला अरबन कॉ-आपरेटिव बैंक से जुडे उनके मामले की सीबीआई जांच की मांग की है।

डॉ फिरोजा बानो के निशाने पर सहकारिता विभाग 

सहकारिता मंत्री अजय सिंह किलक  फिरोजा बानो ने कहा कि मंत्री ने स्वमं की रिश्तेदार और  हाल ही में बैंक की नियुक्त चैयरपर्सन मोनिका चौधरी, उनके कथित रिश्तेदार कर्नल की  प्रबंधन में एन्ट्री के तरीको पर सवाल उठाए।
वर्तमान सीईओ मोहम्मद इकबाल 
फर्जी डिग्री की मदद से रिर्जव बैंक की ओर से निर्धारित नियमों को दरकिनार करते हुए बैंक सीईओ बने है। इकबाल के खिलाफ फिरोजा की ओर से की गई शिकायत की जांच के बाद 18 मई 2018 को अतिरिक्ति जरिस्ट्रार बैंकिक एम पी यादव ने इकबाल खान को सीईओ के पद पर पदस्थाना को नियम विरुद्ध मानते हुए हटाने के आदेश दिए है। लेकिन इकबाल इसके बाद अवैध रुप से बैंक प्रबंधन में काबिज है।
पूर्व प्रशासक रामबाबू शर्मा   
1.बानों ने कहा कि उनपर लगे गबन के मामले में सहकारिता विभाग की ओर से नियुक्त प्रशासक रामबाबु शर्मा ने नोटबंदी के दौरान बैंक में रोजाना 49 हजार जमा करवा 15 लाख रुपय निकालने का भी आरोप लगाया।
2.फिरोजा ने कहा कि रामबाबू शर्मा ने ही प्रशासक का पदभार सम्भालते ही बिना योग्यता रखने वाले बैंक कर्मचारी इकबाल को सीईओ बना दिया।
3.रामबाबू शर्मा पर  बैंक के घाटे में होने के बाद भी बैंक से निलम्बित कर्मचारी गीतांजली अग्रवाल को 25 लाख रुपय नियम विरुध भुगतान कर दिया।
तत्कालीन उप रजिस्ट्रार मरार सिंह जाडावत 
बैंक की पूर्व अध्यक्षा फिरोजा ने कहा कि जाडावत ने दबाव में आकर वर्तमान सीईओ मो इकबाल के खिलाफ आपराधिक मामले की जांच में तथ्यो को नजरअंदाज कर क्लीन चिट दे दी।

क्या कहा बैंक सीईओ मो इकबाल ने    

डॉ फिरोजा बानों की प्रेसवार्ता के बाद तुरंत राजलक्ष्मी महिला अरबन कॉ-आपरेटिव बैंक सीईओ मो इकबाल ने आरोपो का सिलसिलेवार जवाब दिया। इकबाल ने फिरोजा बानो के मंत्री और अधिकारियो पर लगाए गए आरोपो को सिरे से नकार दिया।
लेकिन फिरोजा बानो के उनकी फर्जी डिग्री के आरोप पर राजस्थान विश्वविध्यालय से बीए की डिग्री तो मीडिया के सामने रखी लेकिन 18 मई 2018 को अतिरिक्त रजिस्ट्रार बैंकिग एमपी यादव के आदेश में जिक्र JAIIB/CAIIB उत्तीर्ण होने का कोई प्रमाणपत्र नही पेश कर पाए  साथ ही अरबन को-आपरेटिव बैंक एम्पलाईज सर्विस रुल्स 2006 के नियमानुसार सीईओ पद के लिए निर्धारित मापदंड के दस्तावेज भी नही दिखा पाए ।
हालाकिं इकबाल ने कहा कि उनकी योग्यताओ के खिलाफ बानो की शिकायत पर पुलिस व अन्य ऐजेन्सियां जांच कर चुकी है। उन्होने कहा कि इसी सप्ताह पूर्व अध्यक्षा फिरोजा बानो द्दार गैरकानूनी तरीके से अतुल जैन की कम्पनी को मंजूर ओवरड्राफ्ट की वसूली नही किए जाने का दवाब बनाया था जिसकी प्रतिक्रिया में यह वार्ता की गई है।

दी राजलक्ष्मी महिला अरबन को—ऑपरेटिव बैंक का क्या है मामला 

दी राजलक्ष्मी महिला अरबन को-ऑपरेटिव बैंक में गबन का मामला वर्ष 2016 में सामने आया था। रिजर्व बैंक ने उस वक्त हुए चुनाव को अमान्य करारदे फिरोजा बानो के अध्यक्ष को रद्द कर दिया था। इसी सर्दभ में सहकारिता विभाग ने बैंक प्रशासक नियुक्त कर जांच में गबन का मामला पकड़ा था।जांच में आरोप थे कि रुपए हड़पने के लिए फर्जी एजीएम कराई गई, गलत तरीके से ऋण राहत दी गई। इसके अलावा फर्जी कर्मचारियों के नाम अंकित कर वेतन उठाया गया। विस्तृत जांच के लिए उप रजिस्ट्रार (जेडीए) आरएस चौहान को जिम्मेदारी सौंपी गई। उन्होंने वर्ष 2017 में जांच रिपोर्ट पेश की, जिसमें करीब साढ़े चार करोड़ रुपए का गबन पाया गया।
सुनवाई के बाद न्यायालय उप रजिस्ट्रार सहकारी समिति ने फिरोज बानो सहित आठ के खिलाफ करीब साढ़े चार करोड़ रुपए वसूली के आदेश जारी किए हैं। इसमें से दो करोड़ 62 लाख की वसूली फिरोजा बानो से करने के आदेश थे। निश्चित समय में गबन की राशि जमा नहीं होने पर अब उप रजिस्ट्रार जयपुर शहर ने कुर्की के आदेश जारी किए। यह कुर्की आदेश फिरोजा बानो, मोहनलाल, खूबचंद पमनानी, सुभाष पुरोहित, मदनलाल कट्टा, पंकज पारीक, तेजपाल साहू, अंकित सक्सेना एवं अनुराग के खिलाफ जारी किया गया है।

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