उद्योगों के साथ मिलकर पाठ्यक्रम बनाने से बढ़ेंगा रोजगार -आशुतोष पेडणेकर

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जयपुर, 22 दिसंबर। कॉलेज आयुक्त आशुतोष पेडणेकर ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों को उद्योगों के साथ मिलकर पाठ्यक्रम तैयार करने चाहिए ताकि उद्योगों की जरूरत के हिसाब से छात्र-छात्राओं को तैयार किया जा सके। राज्य सरकार ने इसी बात को ध्यान में रखते हुए इंदिरा गांधी ओपन यूनिवर्सिटी (इग्नू) के साथ मिलकर 16 ऎसे पाठ्यक्रमों को कॉलेजों में शुरू करवाया है, जो जॉब ओरिएंटेड हैं।

पेडणेकर दो दिवसीय ‘हायर एजुकेशन एंड ह्यूमन रिसोर्स कान्क्लेव‘ के समापन सत्र में देश और विदेश से आए एचआर मैनेजर्स को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जिस तेजी से उच्च शिक्षण संस्थानों से युवा अध्ययन पूरा कर बाहर निकल रहे हैं, उसी तेजी से राज्य में रोजगार की संभावनाएं बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी जिलों में इंडस्ट्री-इंस्टीट्यूट-इंटरेक्शन (ट्रिपल आई) सेल बनाई गई है, जो कि निजी और सरकारी संस्थाओं के साथ लाइजनिंग कर छात्र-छात्राओं को रोजगार उपलब्ध कराने में मदद कर रही है। उन्होंने कहा कि विभाग युवाओं को अधिकाधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए सभी जिलों में रोजगार मेले भी लगवा रहा है।

कॉन्क्लेव के दूसरे दिन पैनल डिस्कशंस में देश की दिग्गज कंपनियों के एचआर मैनेजर्स ने हिस्सा लिया और अपने अनुभव साझा किए। इस दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि उनकी कंपनियां नौकरी के लिए चयन करते समय छात्रों में किस तरह की योग्यताओं को प्राथमिकता देती हैं। ज्यादातर मैनेजर्स का मानना था कि कंपनियों की जरूरतों के अनुसार यदि शिक्षाविद छात्रों को तैयार करेंगे तो बड़ी से बड़ी कंपनियों में भी राज्य के युवा अपनी जगह आसानी से बना पाएंगे।

कॉन्क्लेव में रेमंड्स, टाटा मोटर्स, एरिक्सन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, फोर्टिस हैल्थकेयर, कर्लऑन, जीएचसीएस लिमिटेड, पीपल टेलेंट इंटरनेशनल, जेएसडब्ल्यू एनर्जी, इको, सत्या गु्रप जैसी कंपनियों के एचआर मैनेजर्स ने हिस्सा लिया। दूसरे दिन विभिन्न विषयों पर पांच पैनल डिस्कशन हुए, इस दौरान ओपन डिस्कशन भी हुआ।

न्यू एज टेक्नोलॉजी के दौर में एचआर के बदलते परिदृश्य पर परिचर्चा के दौरान एचआर विशेषज्ञों ने बताया कि देश-विदेश की प्रतिष्ठित कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस तकनीक की मदद से उम्मीदवारों का चयन कर रही हैं, ऎसे में शैक्षणिक संस्थानों को औपचारिक शिक्षा के अलावा छात्र-छात्राओं के नेतृत्व और तकनीकी दोनों क्षमताओं का विकास करना होगा। विशेषज्ञों ने कहा कि शिक्षाविद यदि बाजार की नब्ज देखकर छात्रों को तैयार करे तो नतीजे कुछ और बेहतर आ सकते हैं।

पैनल डिस्कशंस में नवचारों के माध्यम से कॉरपोरेट कल्चर का विकास, बाजार की जरूरतों को पूरा करने के लिए उद्योगों और शिक्षण संस्थानों का आपसी सहयोग और एचआर के सामने आने वाली चुनौतियों के समाधान जैसे विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।

गौरतलब है कि दो दिवसीय कान्क्लेव में देश भर से लगभग 75 प्रतिष्ठित कंपनियों के एचआर मैनेजर्स के अलावा ब्रिटेन, हालैंड, गुयाना, यूनाइटेड स्टेट्स आफ अमरीका जैसे कई देशों के राजदूत और गुजरात, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, जम्मू कश्मीर, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, महाराष्ट्र, हरियाणा सहित 20 राज्यों के शिक्षाविद और उच्चाधिकारियों ने हिस्सा लिया।

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