बंद करो पेट्रोल को “ट्रोल” करना :- व्यंग्य अनिल सक्सेना “अन्नी”

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anil-saxsena-anniनिल सक्सेना “अन्नी” एक जरा सी बात पर वो विद्रोही हो गये जी। बात ना बात की पूंछ बस लगे उटपटांग गरियाने।पेट्रोल कुछ पैसा महंगा क्या हो गया,बस सर पर आसमान उठा लिया।असल मे वो है ही नकारात्मक सोच के। इनसे पूछो जितने पैसे इस पेट्रोल के बढ़ते हैं, उतने की तो ये पान की डंडी भी नही खरीद सकते।ऐसी बाते करते हैं जैसे सरकार को और कोई काम ही नही। सरकार जिस दिशा में आगे बढ़ रही है उसकी तो वो तारीफ करते नही बस आलतू फालतू के मुद्दों को हवा देते रहते है।

उधर सरकार तन मन धन से एकरूपता के प्रयास में धड़ाधड़ सरकारे बनाये जा रही है ताकि सभी की दृष्टि,सोच और समझ में एकरूपता आ जाये।उधर वो पेट्रोल में माचिस दिखाने की फिराक़ में घूम रहे हैं। प्रतिदिन पेट्रोल के दाम बढ़ाना भी तो एक तरह की एकरूपता ही है।

अरे भाई, इस छोटी सी घटना को काहे प्रॉब्लम बना रहे हो, अरे,हिम्मत हो तो “चैलेन्ज” लो और तुरंत साईकल की सफाई करके, उसकी सीट पर जम जाओ और समाज के लिये एक उदाहरण पेश करो, तब तो समझा भी जायेगा वो जनाब देशभक्त हैं।हमने उन्हें आश्वासन भी दे दिया कि देशभक्ति का सर्टिफिकेट भी दिलवा देंगे।
वैसे भी ज्ञानी कह रहे हैं कि सब फिट हो जायेंगे तो इंडिया अपने आप फिट हो जायेगा।
तो चलो पैदल
जी लो हरपल ,और कभी पर्यावरण की सोची कि पेट्रोल डीजल से कितना प्रदूषण फैल रहा है।सरकार दूरदर्शी है इसीलिये वो चाहती है कि पेट्रोल के दाम इतने बड़ा दिये जाये ताकि लोगों को अपने वाहन को हाथ लगाने में भी दहशत हो जाये। जरा कल्पना कीजिये, फिर से पुराना ज़माना आ जाये और सड़कों पर पैदल चलते यात्रियों के साथ घोड़ा गाड़ी, बग्गियां भी नज़र आने लगे।गरीब e रिक्शा वाले दुआएं देंगे सो अलग।

हमारी बाते वो जरूरत से ज्यादा समझ बैठे और तुरंत बोल उठे कि अंकल जी इस हिसाब से तो सरकार को रसोई गैस के दाम भी तगड़े बड़ा देने चाहिये ताकि लोगों को डाइटिंग की आदत पड़ जाये और फिर देखिये कैसे हमारा देश और हम नागरिक फिट हो जाते है।

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